Page views

Showing posts with label किसान. Show all posts
Showing posts with label किसान. Show all posts

Friday, 25 May 2018

पेट्रोल-डीज़ल दोनों महंगे होते हैं लेेकिन चर्चा पेट्रोल की ही क्यों होती है?





पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों पर जब भी चर्चा की जाती है तब पूरी चर्चा घूम फिर कर पेट्रोल पर ही आकर ठहर जाती है।जैसा आमतौर लिखा जाता है ‘पेट्रोल-डीज़ल’ वैसे ही डीज़ल हमेशा पीछे छूट जाता है। 
सोशल मीडिया में तरह-तरह के जोक बनते हैं, बाइकों के अंतिम संस्कार के फोटो वायरल होने लगते हैं। और डीज़ल पर चर्चा ही नहीं हो पाती। चर्चा नहीं होती कि डीज़ल की कीमतें बढ़ने से किन-किन चीज़ों पर असर पड़ता है। पेट्रोल महंगा होने से ज्यादातर कार और बाइक चलाने वाले ही प्रभावित होते हैं जबकि डीज़ल से खाने-पीने की चीज़ों समेत कई जरूरी समान महंगे होते हैं। और सबसे ज्यादा मार पड़ती है किसानों पर। किसानों की आय बढ़ाने की दावा करने वाली सरकार को इस बात का आभास ही नहीं है कि इससे किसानों की माली हालत कितनी खराब हो रही है। वर्तमान युग में पूरी तरह ट्रैक्टरों के माध्यम से ही जुताई का काम किया जाता है और डीजल की कीमतें बढ़ने से फसल की लागत बढ़नी तय है। ''कितना हास्यसपद है कि किसान जो फसल पैदा करता है उसका मूल्य सरकार हर साल खुद तय करती है लेकिन उस फसल पर लगने वाली लागत डीज़ल की कीमतों के साथ बढ़ जाती है और उसकी मार किसान पर ही पड़ती है।''
डीज़ल और पेट्रोल लगातार ऊंचाईयों के नई कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और सरकार बार-बार यही दोहरा रही है कि तेल की कीमतें उसके हाथ में नहीं हैं लेकिन अगले ही पल सरकार बेनकाब हो जाती है जब कर्नाटक चुनाव के समय 19 दिन तक कीमतें नहीं बढ़ती और चुनाव के बाद से लगातार 13 दिन तक कीमतें बढ़ती जाती हैं।

तेल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित हो रहे लोगों और किसानों की परेशानी छिपाने के लिए कुछ बेहूदा तर्क बीजेपी आईटी सेल की तरफ से वायरल किए जा रहे हैं जिसमें कहा जा रहा है कि मोदी सरकार ईरान का कर्ज चुका रही है। दरअसल ये सरासर झूठ है बल्कि सच ये है सरकार ने करीब 11 बार एक्साइज ड्यूटी को बढ़ाय़ा है जबकि महज एक बार घटाया है। जिससे पिछले 4 साल में सरकार ने अपनी और तेल कंपनियों की जेबें खूब भरी हैं।

एक और बेहुदा तर्क दिया जा रहा है कि लोग 600-700 रुपये की शराब की बोतल आसानी से खरीद लेते हैं और पेट्रोल-डीज़ल खरीदने में दिक्कत होती है। वो लोग भूल रहे हैं कि पेट्रोल-डीज़ल ‘जरूरत’ है और शराब ‘शौक’। और जिसकी जरूरतें पूरी हो जाती हैं वही लोग शौक पूरा कर पाते हैं।

Tuesday, 8 May 2018

'प्रधानमंत्री जी आप अच्छी बात कहते हैं और खुद ही भूल जाते हैं'





कहते हैं कि इश्क और ‘चुनावी जंग’ में सब जायज़ है। शायद इस कहावत को हमारे प्रधानमंत्री ने बहुत गंभीरता से अपना लिया है तभी विदेशों में बड़ी समझदारी का परिचय देने वाले प्रधानमंत्री मोदी ‘चुनावी मोड’ में आते ही अपने द्वारा ही कही अच्छी बात भूल जाते हैं।
मिस्टर प्राइम मिनस्टर आप लंदन में रेप के मामलों पर राजनीति ना करने की सलाह दे रहे थे और कर्नाटक पहुंचते ही खुद रेप पर राजनीति करने लगे। कांग्रेस ने तो शायद आपकी की उस सीख को गंभीरता से ले लिया। मगर अफसोस आप खुद भूल गए। आपने कांग्रेस के कैंडल मार्च पर बोलते हुए कहा कि मैं कांग्रेस के उन लोगों से पूछना चाहता हूँ जो दिल्ली में कैंडल मार्च निकाल रहे थे वे तब कहाँ थे जब बीदर में दलित लड़की का बलात्कार हुआ था। लंदन में जब आपने कहा था कि रेप के मामले में हिंदू-मुस्लिम एंगल नहीं निकालना चाहिए। हम सबको आपकी बात बड़ी अच्छी लगी थी, लेकिन कर्नाटक में तो आपने जाति तक निकाल ली।
वैसे दिल्ली में कैंडल मार्च निकालने वालों की बात जब आप कर रहे थे तब आप शायद खुद भूल गए दिल्ली में कैंडल मार्च तो बीजेपी नेताओं ने भी निकाला था क्या बीजेपी नेता बीदर भी गए थे?

इसी तरह जब आप कहते हैं कि हमारी सरकार ने अभी तक जितने भी बजट पेश किए हैं उनके ‘केंद्र’ में हमेशा किसान ही रहा है...तब मिस्टर प्राइम मिनिस्टर आप फिर भूल जाते हैं कि आप जिस कर्नाटक और वहां के किसान को ‘केंद्र’ में रखने की बात कर रहे हैं..उसी कर्नाटक के पड़ोसी राज्य तमिलनाडू के किसान देश, मीडिया और राजनीति के ‘केंद्र’ दिल्ली में महीनों डेरा डाले रहे। लेकिन आपकी नजर नहीं पड़ी।

आप बीजेपी के लिए बार-बार कर्नाटक जा रहे हैं, एक दिन में तीन-तीन रैली कर रहे हैं, किसानों की बात कर रहे हैं। और जब किसान आपसे मिलने की उम्मीद में दिल्ली आए थे, उन्होंने आपका ध्यान अपनी ओर करने के लिए क्या-क्या नहीं किया? सड़क पर खाना खाया, मूंह में चूहे दबाए लेकिन आपका ध्यान भंग नहीं हुआ। आप कहते हैं कि केंद्र सरकार ने नई फर्टिलाइज़र नीति तैयार की है, जिसके कारण अब किसान को खाद के लिए सड़कों पर घूमना नहीं पड़ रहा है लेकिन दिल्ली में आप से कुछ ही दूरी पर भीषण गर्मी में किसान नग्न होकर सड़क पर प्रदर्शन करते हैं। लेकिन आपके दफ्तर के दरवाजे बंद रहते हैं।
मिस्टर प्राइम मिनिस्टर आप बार-बार क्यों भूल जाते हैं कि आप किसानों के, आदिवासियों के, हर धर्म और जाति के प्रधानमंत्री हैं। आप पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं। आप सिर्फ बीजेपी के स्टार प्रचारक नहीं हैं।